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मेरे नाना - नानी और आज़ाद भारत

Posted On: 10 Feb, 2014 Others,social issues,Politics में

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मेरे नाना पंडित चंद्रमणि गुसाईं देशभगत और गांधीजी के सच्चे अनुयायी थे I उन्होंने स्वदेशी आंदोलन में स्वयं ही अपनी दूकान से विदेशी टोपियों को बाहर निकाल कर आग लगादी I जलाते वक़्त कांग्रेसी कार्यकर्त्ता कई कीमती टोपियां निकाल कर ले गये l १९४७ के देश विभाजन में मुस्सलमान दंगाइयों ने लाहौर में उनकी हत्या करदी i मुझे याद है कि अमृतसर में मेरी नानी, जिसे मेरी मां पाभी कहकर बुलाती थी, वह भीख मांग कर गुजर करती थी l बाद में मेरे छोटे मामा ने नौकरी लग जाने पर उसकी देखभाल की और मेरे नानाजी को स्वतन्त्र्ता सैनानी घोषित किया गया l मेरे नाना – नानी की याद में मेरी दिल रोता है और आँखे भर आती हैं I
याद आता है सहगल का गाना ‘दिल रोता है तेरे लिए आंसू न बहेंगे l हम बर्बाद रहेंगे ल’

क्या आज़ाद भारत में इतिहास फिर दोहराया नहीं जायेगा l सामान अधिकार कानून ठन्डे बस्ते में और समाजवाद का ठंडा बस्ता मुलायमजी के गले में i कहा जाता है कि रोम जल राह था और (वहाँ का राजा) नीरो हस रहा था l मुजफरनगर में असहाय दंगा पीड़ित सर्दी से ठिठुर रहे थे और उन के बच्चे मर रहे थे और उधर सफियां में शराब और नाचगाने का आलम था l

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