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मुल्ला-यम चले प्रधान मंत्री बनने - 2

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जिंदगी ख्वाब है, ख्वाब में झूठ है क्या और भला सच है क्या | मुल्लायमजी का ख्याल है कि ” सब सच है ” | आज भी वह दिन में स्वप्ने देखते हैं और प्रधान मंत्री की कुर्सी के लिए कोई न कोई टिक्रम लगाने की सोचते रहते हैं | कांग्रेस की धमकियों के कारण उन्हें शायद ठीक तरह नींद भी नहीं आती, बार-बार अपने-आपको वह साईकल से गिरा पाते हैं और फिर शायद नींद की गोली यां कोई और उपचार करते हैं | ‘पत्थर के सनम’ मायाजी का हाथी इतना मज़बूत और ताक़तवर है कि उसे नकली (pseudo-socialist and pseudo-secular ) समाजवादी पार्टी की साइकल द्वारा गिराना तो दूर अपनी जगह से हिला पाना भी मुश्किल है | माया कि माया का तो कोई पार भी नहीं पा सकता | कांग्रेस मायावती और मुस्लिम नेता मिलकर जब चाहें अखिलेश के निरान्कुश शासन को हटा अपने वोट बैंक को बढ़ा सकते हैं | यमुनाजी भी रेत की चोरी के कारण अखिलेशजी से नाराज हो गई और दुर्गा शक्ति की सचाई और ईमानदारी के सामने अखिलेश ने अपनी छवि ख़राब करली | एक तरफ मुल्लायमजी ‘आमदनी से अधिक सम्पति’ के कारण सी.बी.आई. के चंगुल में हैं ओर दूसरी तरफ कांग्रेस का कोई भरोसा नहीं | प्रधान मंत्री की कुर्सी देना तो दूर कहीं उनके बेटे अखिलेश से मुख्यमब्त्री की कुर्सी भी छिन जाये | समाजवादी पार्टी का जातिवादी छवि से उभरना यो दूर अब तो उसका सेकुलरिज्म का मुखोटा भी गिर गया है | कांग्रेस तो नीचे से कुर्सी खींचने में माहिर है | एक तरफ मुल्लायमजी को ‘आमदनी अधिक सम्पति’ हजम नहीं ही रही और सी.बी.आई. ने गर्दन पकड़ रखी है और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश छीनने की कांग्रेस की शैतानी चालें |
पहले मुल्लाओं के दबाव से मुलायामजी की सांस घुटी रहती थी पर अब तो लगता ही गला ही घोंट देंगे | ऊपर से वह गैर – सम्प्रदायिकता का मुखौटा पहने समाजवादी पार्टी की शह पर उत्तर प्रदेश में कितने दंगे हो चुके हैं उनका हिसाब नहीं l इधर मुज़फ्फरनगर के दंगों के कारण समाजवादी पार्टी की साख ही रसातल में चली गयी है | महंगाई, भ्रष्टाचार, कुशासन और लूटमार की मार सह रही मुस्लिम समुदाय की नज़र से मुल्लायमजी का दोगलापन अब बिलकुल छिपा नहीं | अगर मुस्लिम वोट हाथ से निकल गया तो पहलवानजी झाँगो पर हाथ मारते रह जायेंगे और कुश्ती करना भूल जायेंगे |’ मैं इधर जायूं यां उधर जाऊं शशोपन में कहीं बीत न जाये रैना | रिस्क तो लेना ही पड़ता है अन्यथा मौका हाथ से निकल जाता है | अन्दर-ही-अन्दर मुल्लायम जानते हैं, कि कांग्रेस की गिद्ध-द्रष्टि उनकी हर हरकत पर नज़र रखे हुये है, फन उठाते ही कुचल दिया जायेगा और कांग्रेस जब चाहे उन्हें बेपर्दा कर देगी |

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1 प्रतिक्रिया

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rekhafbd के द्वारा
September 13, 2013

बढ़िया आलेख


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