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उन्नति - प्रोन्नति के रास्ते |

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प्रोन्नति और आरक्षण दोनों ही उन्नति के बादक और बराबरी के अधिकार का अतिक्रमण हैं | मायावती और दुसरे दलित नेता अब दलितों को आरक्षण और प्रोन्नति से अधिक नहीं रिझा सकते | पत्थर के हाथी किसी के भी काम नहीं आ सकते | अच्छा तो यह होगा की इनको छोटे बच्चों के खेलने के लिये बच्चों के पार्कों और स्कूलों में वितरित कर दिया जाये | मायावती के हाथी मायावती प्रोन्नति की माया फ़ैलाने में कदाचित सक्ष्म नहीं हैं | अगर जनता का पैसा गरीब बस्तियों और गाँव – गाँव अम्बेडकरजी के नाम स्कूल खोल दिए होते तो मायावती को अत्यन्त लाभ होता | एक उन स्कूलों में वार्षिक कार्यक्रम होते और दूसरी तरफ श्री भीमराव अम्बेडकरजी की जयंती मनाई जाती |

” कोयले की दलाली में मुह काला ” कर कांग्रेस ने भी अपनी छवि काली नहीं तो धूमिल अवश्य कर ली है | प्रोन्नति का जनून उसे और ले ढूबेगा | मध्यम वर्गों का वोट बैंक जो काफी हद तक नेतायों के उनके अपने क्षेत्रों में व्यक्तिगत प्रभाव में अब भी है | कांग्रेस के लिये यह अच्छा होगा कि प्रेजिडेंट रूल डिक्लेयर कर काले मुहवाले नेतायों को बाहर करे ( Purge the party of bad elements ) और उनके खिलाफ अपराधिक मामले दर्जकर सख्त कार्यवाही करे, नहीं तो इस डूबते जहाज का अल्लाह ही मालिक है |
अब कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी का ” ख्याल आता है ” पहले भी तो कांग्रेस को यह ख़याल क्यूँ नहीं आया कि भारतीय जनता पार्टी के मुख्या मंत्रियों पर तोहमत लगायी जा सकती है | ” यह पब्लिक है सब जानती है ” लोक सभा में सुषमा स्वराज ने सही कहा है कि ” मोटा माल ” | एक रूपये में अंडमान – निकोबार का टापू बिक गया | क्या जनता अंधी है यां फिर कांग्रेस की जनता के बारे में यही सोच है ?

बाकि रही समाजवादी और दूसरी पार्टियाँ, जितना भी वक़्त वोह इस डूबते जहाज के सहारा देंगी उतनी ही उनकी छवि भी खराब होगी | मनुष्य अपनी संगती से पहचाना जाता है ( A man is known by the company he keeps. )| यू.पी.ऐ को बसाखी का सहारा देकर यू पी में समाजवादी पार्टी का समाजवाद को भी धक्का लगा है | ” जितना नहाती उतना पुण्य ” छोडो कालिखपुते चेहरों को कही ऐसा ना हो की कोयले की कालिख का दाग समाजवादी पार्टी के चेहरे पर भी लग जाये | ” कही दाग ना लग जाये ”

समाजवादी पार्टी ने प्रोन्नति के मुद्दे से मुख मोड़ दूरदर्शिता से अपनी गैरत बचाली | अब समय आगया है कि आरक्षण को यां तो धीरे धीरे कम किया जाये यां फिर परिवार के मुखिया को आरक्षण मिलने के बाद उसके परिवार को आरक्षण ना मिले और वह आरक्षण का कोटा दूसरों को मिले | वैसे भी आरक्षण का लाभ काबिल दलितों तक ना पहुँच अधिकतर एक मलाई खाने वाले वर्ग तक पहुँचता हैं | इससे इस मुद्दे को उठाने वाली राजनितिक पार्टी और सही मायिने में दुसरे जरूरतमंद पिछड़े वर्गों और जनजातियों को भी लाभ होगा | डर तो यह भी है, कि कहीं यह छद्य – पंथनिरपेक्ष राजनितिक पार्टियां कहीं देश को ही न ले | डूबे हम तो डूबे हैं सनम तुझको भी ले ढूबेंगे |

कब तक गुण और योग्यता का अपमान सहता रहेगा देश ? कब तक चलेगी भ्रष्टाचार की ” बांटो और राज करो की नीति ” और मिटेगा आरक्षण का अभिशाप ? कब आएगा आरक्षण का आर्थिक आधार | कब होगी चाचा नेहरु के हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ? कब मिलेंगे सामान्यता के अधिकार ?
कितने दिन आँखें तरसेंगी,
एक दिन तो बादल बरसेंगे |
ऐ मेरे प्यार के दिल,
आज नहीं तो कल महकेगी,
ख्वाबों की महफ़िल |



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ASK के द्वारा
September 18, 2012

जल्द आ रहा है शहर-शहर, गाँव-गाँव में | देखना न भूलिये महंगाई रसोई के चूल्हे पर, और कांग्रेस का वोट भी गैस के चूल्हे पर | कांग्रेसी भ्रष्टाचारियों के पकन परोंठे, ते यूं पी ऐ दे साथियों दी अग न बले | हाया रबा वे ओनाह दी अग न बले, हाया रबा वे साढ़ी अग न बले |


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