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अन्ना से अग्नि तक |

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अग्नि स: अग्रणी भवति | वही अग्नि स्वरुप ईश्वर हमारा माता, पिता, आचार्य, गुरु, साथी, मित्र और न्यायाधीश है | अग्नि स्वरुप परमात्मा ही हमें जीवन के हर एक पहलू और मोड़ पर आगे ले जाता है | बिना अग्नि अर्थात ऊर्जा – अनर्जी के जीवन आगे नहीं चल सकता | ऊर्जा के बिना शरीर निष्क्रिय हो जाता है अर्थात कोई क्रिया – कलाप नहीं कर सकता | मृत्यु पर कहते हैं ठंडा हो गया है |
अग्रणी – अग्नि हमें कर्त्तव्य कर्म के प्रति सचेत करता है और पुरषार्थ के लिया सक्रिय करता है | इस संसार का निर्माता और आत्मा को शरीर और ऊर्जा देनेवाला, आगे लेजाने वाला अग्नि-स्वरुप परमपिता परमात्मा ही है | संघ गमे महि – जीवन में भी अग्नि स्वरुप हमारे साथ – साथ चलता है | इतना ही नहीं वोह ज्ञान – स्वरुप अग्नि अच्छा – बुरा, सत्य – असत्य, न्याय – अन्याय, धर्म – अधर्म, ज्ञान – अज्ञान, विद्या – अविद्या, चेतनता – अचेतनता, कर्म – अकर्म, स्वप्न – अस्वप्न, दया – निर्दया, दोष – निर्दोष ,भय – अभय, शंका – निशंका, लज्जा – निर्लज्जा आदि पर भी प्रकाश डाल कर मनुष्य ( मनवाला, मननशील मानव, man ) का मार्ग दर्शन करता है | ज्ञान का प्रकाश करने से अग्नि ज्ञान स्वरुप ( ज्ञान योग ) है | कर्म करने से अग्नि कर्म स्वरुप ( कर्मयोग ) है | जहाँ ज्ञान के प्रकाश से कर्म होता है वहीँ कर्म करने से भी ज्ञान प्राप्ति होती है | जहाँ पर प्रकाश होता है वहां थोड़ी गर्मी भी होती है और जहाँ गर्मी हो वहां थोडा प्रकाश भी होता है | यही है, यही है रंग – रूप अन्नाजी के संघर्ष का |
सिधान्तों ( थिओरी ) से प्रयोग – उपयोग ( प्रेक्टिकल ) और प्रयोग – उपयोग से सिधान्तों का भी ज्ञान भी बढ़ता है | महर्षि दयानन्दजी ने आर्य समाज की स्थापना की और लिखा की “संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना | मानव – मात्र की उन्नति (अभ्युदय ) इन्ही में से एक, दो यां तीनों को मिला के सम्भव है | शारीरिक उन्नति जैसे स्वस्थ और बलशाली शरीर से ओलम्पिक में मैडल प्राप्ति का यश | ज्ञान से अनुभव, अन्वेंषण और आविष्कारकी प्राप्ति होती है | सामाजिक उन्नति और सामाजिक न्याय के लिये भ्रष्टाचार के विरुद्ध जैसे अन्नाजी, अरविन्द केजरीवाल, गोपाल राय, मनीष सिसोदिया और किरण बेदी एक तरफ और दूसरी ओर भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ स्वामी रामदेवजी संघर्ष कर रहे हैं |
इस देवासुर संग्राम में एक तरफ देवता हैं और दूसरी ओर भ्रष्टाचारी नेता और उनके मुखिया असुरों की भांति हर प्रकार के अन्याय और ज़ुल्म के हथकन्डे अपना रहे हैं | कहीं ऐसा न हो कि यह भ्रष्टाचारी, अनाचारी और दुराचारी नेता सदाचार और भारतीय संस्कृति को नष्ट कर दें और देश की आजादी को हमेशा – हमेशा के लिये अंधेरों में ढूबो जायें ? एक तरफ अग्नि स्वरुप परमात्मा कि प्रेरणा से बलिदान की प्रेरणा और दूसरी तरफ नेताओं के स्वार्थ की ख़ामोशी | लगता है कि राजनीति के साथ – साथ न्याय और मीडिया भी सरकारी हो गया है |
वेद कहता है – देवा: ना सपन्ति जाग्रति – जाग्रति देवा: | हे देवतायो – विद्वानों – बुद्धिजीवियों – देशभगतों जागो होश म एं आयो – उठ -खड़े हो जायो – कही देर ना हो जाये और आनेवाली पीदियाँ हमें कोसें | अन्ना हमारे लिए अग्रणी – अग्नि है अपने लिए नहीं | अन्ना हमें जगाने के लिए प्रकाश-पुंज है | जिंदगी जिन्दादिली का नाम है मुर्दादिल खाक जीते हैं |
जागो वतन खतरे में है |
सारा चमन खतरे में है ||

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra के द्वारा
August 3, 2012

दोस्तों जिस तरह अन्ना का पन्ना बंद हुआ हमें उससे शिक्षा लेनी चाहिए: १.जो मीडिया की वजह से जीते हैं वो मीडिया की वजह से मर जाते हैं. २.हमेशा स्वहित से ऊपर देशहित को रखना चाहिए . ३.हिंदी,हिन्दू और हिंदुस्तान का कोई विकल्प नहीं . ४.दुसरे के(राजीव दिक्सित और बाबा रामदेव के जन जागरण) किये कार्य का श्रेय नहीं लेना चाहिए . ५.लोगों के बिच भ्रम(लोकपाल पर दो बार झूठी जीत और लोकपाल को हर मर्ज की दवा बताना) फैलाकर हासिल की गयी लोकप्रियता टिकाऊ नहीं होती. ६.अच्छे लोगों(बाबा रामदेव और मोदी) को बुरा बता कर लोकप्रियता हासिल नहीं की जाती. ७.स्वदेशी के बिना स्वराज अधुरा होता है इसलिए निबुज्ज पी कर अनसन न तोड़े . ८.बिना पूरी तैयारी और जानकारी के कोई काम न करें. अब सब मैं ही बोलूँगा आप कुछ नहीं बोलोगे ..?

bharodiya के द्वारा
August 2, 2012

अग्नी जठर मे सिमट गया है जठराग्नी बन के । ईसे बुजाने अग्नी प्रकट होता है भुजाओ में । लेकिन बुज जाता है जठराग्नी के साथ । आग बुजाने के सिलिन्डर लिए हाथ, खडा है दुशमन, खडा है मिडिया छिडकते हैं अंगारवायु कहीं अन्ना की आग दावानळ ना बन जाए ।

    dineshaastik के द्वारा
    August 2, 2012

    वाह…वाह!!! सुन्दर प्रतिक्रिया…..


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