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नजीबा का नसीब - आंतक का घिनोना चेहरा |

Posted On: 11 Jul, 2012 Others,न्यूज़ बर्थ में

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अफगानिस्तान के राज्य परवान गाँव कोई में आंतकियों ने कैसे ऐ के – ४७ चला २२ SAl की एक अबला और असहाय औरत नजीबा को गोलियों से छलनी कर मार डाला | यह दरिंदगी नहीं तो क्या है | क्या इस्लाम और दुसरे मजहबों में नजीबा जैसी अबला और असहाय औरतों का यही नसीब है ?
जैसे इस्लाम यशु को भी मसीहा मानता है | भगवान यशु अर्थात मसीहा यशु ने कहा था हाँ जमीन में कमर तक गाड़ी हुई बेबस औरत को पत्थर मरने का अधिकार उसको है जिसने कभी कोई पाप न किया हो | जिस आंतकी ने उस औरत से नाजायज़ सम्बन्ध बनाये औरत की जगह उसके हाथ पीठ पर बांध कर यां कमर तक जमीन में गाड कर पत्थर मार – मार कर अरबी कानून के मुताबिक उसको हलाक कर देना चाहिए था | परन्तु काफ़िर और कायर आंतकी खावंद ने अपनी औरत की इज्ज़त ख़राब करने का बदला नहीं लिया और बेशर्मी से जी रहा है | थू है उसके मूह पर और धिक्कार है उसकी मर्दानगी पर |
करीबन दो साल पहले सहारनपुर साईड की तरफ एक ससुर ने बहु-बिटिया की इज्ज़त लूट ली | मौलवी का इन्साफ यह था की अब वोह अपने पति की माँ बन गयी है | होना तो यह चाहिए था कि अपराधी ससुर के हाथ पीठ पर बांध कर यां कमर तक जमीन में गाड कर पत्थर मार – मार कर अरबी कानून के मुताबिक उसको हलाक कर देना यां फिर जब्बर्दस्ती इज्ज़त लूटने के LIYE कानून के हवाले कर देना चाहिए था |
इसी तरह पंजाब के एक गाँव में बहुयों को रंडवा ससुर को खुश करना पड़ता था अन्यथा ससुर शादी कर जमीन – जयदाद के और हक़दार पैदा कर देता | ऐसी समस्या का कोई इलाज नहीं है परन्तु SAMAJ और कानून की निगाहों में यह अपराध है | ऐसे रंडवा और भोग – चाहने वाली विधवाओं के लिये अलग स्थान निर्धारित कर देना चाहिए यान वोह बाँझ से शादी करले | समलैगिक सम्बन्ध बनानेवालों के लिये भी अलग स्थान जैसे कोई टाप्पू – जजीरा होना चाहिये तांकी वोह दूसरों को बहला-फुसला कर समाज में अपनी अपनी गन्दगी न फैला सकें |
कोई भी मजहब बहुओं, बेटियों, बेटों, माँ सम्मान औरतों जैसे चाचा – चाची, बुआ – फूफा, मौसा- मौसी, मामा मामी , और गैर औरतों – मर्दों से नाजायज सम्बन्ध रखने कि इज़ाज़त नहीं देता |
वेद तो बुदापे में वानप्रस्थ और संन्यास लेकर जन -कल्याण का आदेश देता है |
यत्र नारे पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता | जहाँ बहुयों, बेटियों, बहनों – भाभियों और मातायों और सास – मातायों और रिश्तों कि दूसरी औरतों को इज्ज़त से देखा जाता है वहां देवता वास करते हैं और जहाँ औरतों को बुरी नज़र से देखा जाता है वहां सब कुछ नष्ट हो जाता है | जहाँ औरत और मर्द कुते – कुतियों कि तरह रहने लग जाते है, वहां परिवार नष्ट हो जाते हैं और बच्चे रुल जाते हैं और वह समाज – और राष्ट्र भी नष्ट हो जाता है |
औरंत ने जन्म दिया मर्दों को,
मर्दों ने उसे बाजार दिया |
जब जी चाहा मसला – कुचला —

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ASK के द्वारा
July 27, 2012

प्रिय दिनेशजी आपके सत्य हैं कि यह केवल आतंकी नहीं, अपितु इस्लाम के मुताबिक भी काफिर हैं। इस्लामी धर्म गुरू इनके कत्ल का फतवा जारी क्यों करेंगे ? स्वार्थ के आगे धर्मगुरु और भ्रष्ट नेता मजबूर हैं

ajaykr के द्वारा
July 14, 2012

सटीक लेखन और नारी की दुर्दशा चित्रण

yogi sarswat के द्वारा
July 13, 2012

औरंत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया | जब जी चाहा मसला – कुचला — ये शब्द दिल की गहराइयों तक पहुँचते हैं ! बहुत सटीक लेखन

jagojagobharat के द्वारा
July 13, 2012

बहुत सुन्दर आलेख .

dineshaastik के द्वारा
July 12, 2012

मेरे विचार से यह केवल आतंकी नहीं, अपितु इस्लाम के मुताबिक काफिर भी हैं। क्या इस्लामी धर्म गुरू इनके कत्ल का फतवा जारी कर सकते हैं?


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