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दोगले - ना घर के ना घाट के|

Posted On: 10 Jul, 2012 Others में

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दोगले – ना घर के ना घाट के|
दोगले पाश्चात्य सभ्यता के पुजारी और व्यापारी आज विदेशी और देसी औरतों का नाच करा गौरव हासिल कर रहे हैं तो आज कितने ही सिने और दुसरे पत्रकार भी रोज़ी – रोटी के लिए उसी रंग में रंगे हैं | पित्तर बुद्धिजीवी अपने दांत खो बैठे है, तो संतानों के बचे खुचे थोड़े – बहुते संस्कारों पर स्वार्थ और भौतिकवाद हावी है |
कहाँ खो गया है मेरे सपनो को भारत और महात्मा गाँधी का रामराज्य का सपना | आम जागरूक सामाज तो कहीं भी नज़र नहीं आता । दुष्ट राजनेताओं के सामने भारत माता दुरोपदी की भांति मजबूर नज़र आती है | भगवान् कृष्ण का तो दूर – दूर तक कोई पता नहीं | दुष्ट जरासंध के कारण कृष्ण को मथुरा छोडनी पड़ी तो दुष्ट नेताओं के कारण बाबा रामदेव को दिल्ली | अरविन्द केजरीवाल को सरकारी नौकरी छोड़ने के बावजूद सिक्यूरिटी का पैसा उधार लेकर चुकाना पड़ा | कांग्रेस रुपी कौरव गिनती के सहारे धृतराष्ट्र – मनमोहन को राजगद्दी पर बिठा काम-चलाऊ सरकार चला कर अपनी – अपनी गोटी फिट कर रहें है | बार – बार मुकरने वाले प्रणब मुकर्जी अब राष्ट्रपति बनने चले हैं |
महारथी लालकृष्ण अडवाणी बुढ़ापे के कारण रथ में सवार हो कर गांडीव उठा नहीं पा रहे और अर्जुन का रोल निभाने में असमर्थ हैं | जेटलीजी अर्जुन का रोल निभा सकते हैं पर पांडवों में फूट देख दुरोपदी स्वयम राजगद्दी के सपने देख रही हैं | कृष्ण का सुदर्शन चक्र गडकरी के हाथ में है तो मोदी द्वारिका – गुजरात में होने के कारण कृष्ण का पाञ्चजन्य शंख बजा प्रधान मंत्री पद के लिए बार – बार शंखनाद करते हैं |
पोर्न संस्कृति नहीं दुराचार, पापाचार है और अपराध का नंगा नाच है | समाज को अपनी शक्ति को पहचानना चाहिये और संगठित हो कर संस्कृति की रक्षा करनी चाहिये | धर्म क्षेत्रे कुरु क्षेत्रे अर्थात कर्म के क्षेत्र में आकर अपनी संस्कृति और संस्कारों की रक्षा करनी चाहिये | वयं राष्ट्रे जाग्रयाम पुरोहितः | राष्ट्र की रक्षा के लिए आगे आयो | राष्ट्र हमारी संस्कृति है | राष्ट्र हमारी पहचान है | जागो कहीं देर न हो जाये |
त्याज्य रूढ़ियों से बाहर निकल अपनी आर्यन संस्कृति को पहचानो |
यह वक़्त सोने का नहीं ,
यह वक़्त खोने का नहीं ,
जागो वतन खतरे में हैं,
सारा चमन खतरे में है |
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले
खुदा बन्दे से पूछे कि बता तेरी रजा क्या है |
क्या सत्य ही वर्ग – संघर्ष ने हमारे समाज को अभिजात्य व परम्परावादी खेमों में बाँट दिया है। शेहरी क्षेत्रों में तो ऐसा ही है | चरित्र गिरता रहेगा, देश लुटता रहेगा, जनता कराहती रहेगी, और हम देखते रहेंगे, शासक वर्ग ऐश और विदेशो का भ्रमण करता रहेगा | नेता, उनका गुट और कुछ पूंजीपति अमीर से अमीर और जनता गरीब से गरीब होती जायेगी |
तस्लीमा नसरीन की बेबाक़ प्रस्तुतियों ने उन्हें अपने देश से निर्वासित होने को बाध्य किया । ‘लज्जा’ का कड़वा घूँट कठमुल्लों के गले से नहीं उतरा | कठमुल्लों ने तसलीमा को तस्लीम नहीं किया, स्वार्थी राजनीतिज्ञों ने राजनीति को त्याग और न्याय – नीति को भाढ़ में झोंक दिया और प्रणब मुकर्जी ने दुशासन की भांति तसलीमा का चीरहरण कर देश निकाला दे दिया |
यह सही है की भूमन्डलीकरण और आर्थिक उदारीकरण से आम जनता पीड़ित है खासकर किसान, कामगार, मजदूर और मजबूर | भारत करीबन ७० प्रतिशत गावों में बसता है और ग्रामवासी अधिकतर संस्कारित और स्वावलम्भी हैं और अभी भूमन्डलीकरण और आर्थिक उदारीकरण का प्रभाव कम हैं | ऐसे में पूंजीपति मफिया , सरकारी मफिया, राजनैतिक मफिया और भूमाफिया उनसे उनकी धरती माँ को छीन लेना चाहता है | सरकारी योजनाओं को बेच दिया जाता है और वेस्टद इनतेरस्त्त, सरकार और सरकारी सांडों की मदद से उनकी जमीन औने – पौने दामों पर खरीद दस गुणा यां उससे भी कही ज्यादा मुनाफा कम्मा अपनी तेज़ोरियों में भरते चले जाते हैं | धृतराष्ट्र – मनमोहनजी को कुछ भी नज़र नहीं आता |
एक तरफ भजन – आरती और दूसरी ओर लैपटाप पर पश्चिमी से लेकर देसी पोर्नस्टार्स के चौरासी आसनों का चस्का हमारी सभ्यता को ले डूबेगा | भगवान् राम का चित्र पूजा छोड़ रामचरित मानस को अपनाना पड़ेगा | राम, कृष्ण, दुर्गा की तरह आगे आना पड़ेगा | वयं राष्ट्र जाग्र्याम पुरोहित: राष्ट्र और उसकी पहचान संस्कृति की रक्षा के लिए स्वयं आगे आना पड़ेगा क्यों की हमारे धनुषधारी राम, सुदर्शनधारी कृष्ण और शेरोंवाली दुर्गा अपने कर्त्तव्य कर्म कर के चले गए और उनका अनुकरण हमें करना है |
यूट्यूब पर रामायण, महाभारत, गीता, बाइबिल और कुरान से सम्बन्धित आडियो – वीडियो — सीधे विश्व भर के पोर्नस्टार्स एवं नानस्टार्स के साथ प्राकृतिक – अप्राकृतिक रतिक्रिया का प्रशिक्षण व आनन्द लेने के लिये पलक झपकते पहुँच सकते हैं । अलग – अलग मानसिकता का उत्तर संस्कार ही हैं |
आर.एन. शाहीजी अपने ११.०६.२०१२ के ब्लॉग ‘ आयातित सांस्कृतिक आक्रमण ‘– “jagranjunction Forum” में शालीनता का प्रशंसनीय उधाहरण दिया की : ‘हमारे परिवारों में पति घर के अन्य सदस्यों की नज़र में रात को सोने के लिये घर से बाहर जाता और रात को घरवालों की नज़र से बच कैसे घर में घुसकर निकल जाता’ |
भूमन्डलीकरण और संचार क्रांति की बाईप्रोडक्ट की इन्फ़ेक्शन से बचने के लिये है, हमें अपने संस्कारों ,मूल्यों और गरिमा की रक्षा करनी होगी और विशिष्ट पहचान वाली वैदिक सभ्यता को चरित्र निर्माण द्वारा फिर अपनाना होगा | पाश्चात्य सभ्यता ना केवल भारत अपितु पूरी विश्व बिरादरी का लिये अत्यन्त घातक है |
भारत सदियों से विश्व भर के भटके पथिकों की आध्यात्मिक शिक्षा और सुख – शांति का उपदेश देता रहा है।
जापान आदि देश अपनी आन्तरिक सांस्कृतिक पहचान को इस महामारी से बचाने के लिये बहुत पहले सजग हो चुके थे,
एतद देश प्रसूतस्य सकाशादग्र जन्मना |
स्वम स्वम चरित्रेन शिक्षारेंण प्रिथवयाम सर्व मानवः |
कभी दुनिया भर के लोग चरित्र निर्माण हेतु भारत आते थे, परन्तु अब ऊंची शिक्षा के लिए अमेरिका, आस्ट्रेलिया और यूरोप के देशों में जाना पड़ता है |
भारत की मानव सभ्यता ने सामाजिक ढाँचे को मर्यादों में बाँधा और वर्जित कर्मों का निषेद किया जिनके मूल्य अंतरराष्ट्रीय जो अनिवार्य आवश्यक मानव अधिकार हैं | मनुष्य का असली वस्त्र तो उसका चरित्र होता है | इस लिए संत तुलसीदासजी रामचरित मानस अर्थात राम का मानवीय चरित्र लिखा | सभ्यता, शालीनता और नैतिकता के लिये मनुष्यों के लिये वस्त्र आवश्यक हैं, क्यों की दुसरे प्राणियों की भांति मनुष्य योनी में भी भोग अर्थात यौनिक संस्कार भी निहित हैं | फैशन बुरा नहीं किन्तु नंगापन और अश्लील हरक़ते बुराई को स्वयं निमंत्रण देती हैं | स्वतन्त्रता हमारा संविधानिक और जन्मसिद्ध अधिकार है स्वछंदता कतई नहीं |

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jagojagobharat के द्वारा
July 11, 2012

बहुत सुन्दर लेख

dineshaastik के द्वारा
July 11, 2012

बहुत ही सुन्दर, सटीक एवं सरहानीय प्रस्तुति…

    ASK के द्वारा
    July 11, 2012

    दिनेश आस्तिक जी धन्यवाद | असदो माँ सत्य गमये | सत्य के ग्रहन करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए |


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